क्या आपको डेंगू बुखार हो गया हैं ? तो चिंता मत कीजिये इस लेख में आपको बताएँगे डेंगू से छुटकारा कैसे पाए, ऐसे घरेलु रामबाण ईलाज जिन्हे आप घर पर आजमाकर डेंगू या अन्य बीमारी से हमेशा के छुटकारा पा सकते है। इस लेख में बतायें सभी नुस्खे व ईलाज अमर शहीद श्री राजीव दीक्षित और उनके एकलव्य श्री गोविन्द सरन प्रसाद के अनुभवों पर आधारित हैं। |
डेंगू बुखार के सफल घरेलु उपचार लक्षण व बचाव
डेंगू बुखार :-
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लक्षण :-
डेंगू बुखार होने पर रोगी को अचानक बिना खांसी व जुकाम के तेज बुखार हो जाता है, रोगी के शरीर में तेज दर्द होकर हडि्डयों में पीड़ा होती हैं। रोगी के सिर के अगले हिस्से में तेज दर्द होता है, आंख के पिछले भाग में दर्द होता है, रोगी की मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होता है, रोगी को भूख कम लगती है और उसके मुंह का स्वाद खराब हो जाता है, रोगी की छाती पर खसरे के जैसे दाने निकल आते हैं, इसके अलावा जी मिचलाना, उल्टी होना, रोशनी से चिड़चिड़ाहट होना आदि लक्षण पाए जाते हैं। परन्तु कभी-कभी डेंगू बुखार में खून भी आने लगता है, जिसे हीमोरैजिक रक्तस्राव कहते हैं। हीमोरैजिक रक्तस्राव के समय के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं- लगातार पेट में तेज दर्द रहना, त्वचा ठंड़ी, पीली व चिपचिपी होना, रोगी के चेहरे और हाथ-पैरों पर लाल दाने हो जाते हैं। हीमोरैजिक डेंगू होने पर शरीर के अन्दरूनी अंगों से खून आने लगता है। नाक, मुंह व मल के रास्ते खून आता है जिससे कई बार रोगी बेहोश हो जाता है। खून के बिना या खून के साथ बार-बार उल्टी, नींद के साथ व्याकुलता, लगातार चिल्लाना, अधिक प्यास का लगना या मुंह का बार-बार सूखना आदि लक्षण पैदा हो जाते हैं। हीमोरैजिक डेंगू अधिक खतरनाक होता हैं और डेंगू बुखार साधारण बुखार से काफी मिलता-जुलता होता है। |
डेंगू का इलाज के घरेलु उपाय और आयुर्वेदिक नुस्खे :-
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गिलोय(giloy) :-
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सर्पगंधा :- सर्पगंधा के कन्द (फल) का चूर्ण, कालीमिर्च, डिकामाली घोड़बच और चिरायता के चूर्ण को एकसाथ मिलाने से बनी मिश्रित औषधि में से 1 से 2 ग्राम को सुबह और शाम लेने से डेंगू के बुखार में लाभ मिलता है।
अंकोल :- 3 ग्राम अंकोल की जड़ के चूर्ण को 2 ग्राम मीठी बच या शुंठी के चूर्ण के साथ चावल के माण्ड में पकाकर सेवन करने से डेंगू के बुखार में लाभ होता है। यह फ्लू में भी लाभकारी है।लगभग एक ग्राम से कम की मात्रा में अंकोल की जड़ की छाल को घोड़बच या सोंठ के साथ चावल के माण्ड में उबालकर रोजाना सेवन करने से डेंगू ज्वर में लाभ मिलता है। इसके पत्तों को पीसकर जरा-सा गर्म करके दर्द वाले अंग पर बांधने से भी लाभ होता है।
तुलसी (Basil) :-
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यवक्षार :- लगभग एक ग्राम से कम की मात्रा में यवाक्षार को नीम के पत्ते के रस या नीम के काढ़े के साथ सुबह और शाम लेने से पसीना आने से होने वाला बुखार कम होता है और शरीर का दर्द मिटता जाता है।
ईश्वरमूल :- लगभग आधा ग्राम से 2 ग्राम की मात्रा में ईश्वरमूल (रूद्रजटा) का चूर्ण सुबह और शाम सेवन करने से डेंगू ज्वर दूर हो जाता है।
चिरायता (Chirayta) :-
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कर्पूरासव :- कर्पूरासव 5 से 10 बूंद बतासे पर डालकर सुबह और शाम लेने से खून की नसें फैलती हैं, पसीना आकर बुखार, दाह (जलन) और बेचैनी कम होते जाते हैं।
चंदन :- 5 से 10 बूंद चंदन के तेल को बतासे पर डालकर सुबह और शाम लेकर ऊपर से पानी से पीने से बुखार कम हो जाता है।
मेथी के पत्ते :-
यह पत्तियां बुखार कम करने के लिए सहायक हैं. यह पीड़ित का दर्द दूर कर उसे आसानी से नींद में मदद करती हैं. इसकी पत्तियों को पानी में भिगोकर उसके पानी को पीया जा सकता है. इसके अलावा, मेथी पाउडर को भी पानी में मिलाकर पी सकते हैं |
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साधारण उपचार :-
डेंगू बुखार तेज होने पर रोगी के माथे पर ठंड़े पानी की पट्टियां रखी जा सकती हैं। हीमोरैजिक डेंगू होने पर रोगी के खून में प्लेटीनेट्स की संख्या बढ़ाने के लिए अतिरिक्त मात्रा देने की आवश्यकता होती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि हीमोरैजिक डेंगू होने पर रोगी को दर्द दूर करने वाली दवा नहीं देनी चाहिए क्योंकि कई बार इन दर्द निवारक दवाओं से रोगी में खून के बहने का डर बना रहता है। इस दौरान शरीर में पानी की मात्रा और रक्तचाप को नियंत्रित करना भी जरूरी होता है।
डेंगू से आसानी से बचा जा सकता है :-
1. घर के अंदर और आस पड़ोस में पानी जमा न होने दें |
2. नीम की पत्तियों का धुँआ घर में फैलायें |
3. पानी के सभी बर्तन को खुला न रखें |
4. किचेन और वाशरूम को सूखा रखें |
5. कूलर का पानी सुबह-शाम बदलते रहें |
6. खिड़कियों और दरवाज़ों में जाली लगवायें |
7. शरीर पर मच्छर को दूर रखने वाली क्रीम लगायें |
8. शरीर पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहनें |
9. सोते समय मच्छर दानी का प्रयोग करें |
10. घर के आस पास मच्छर मारने वाली दवा का छिड़काव करवायें |
11. डेंगू फैलने की खबर मिलते ही अपनी दिनचर्या और खान-पान बदलें |
12. डेंगू एक लाइलाज़ रोग है अभी तक इसकी कोई दवा या वैक्सीन नहीं बनी है। सिर्फ़ शरीर की इम्यूनिटी / रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना ही एक मात्र इलाज है। उपरोक्त लक्षण दिखते ही पास के अस्पताल जायें। |
14. डेंगू होने पर शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या तेज़ी से घटने लगती है। ऐसे में दवा के साथ-साथ खान-पान और सही दिनचर्या रखना बेहद ज़रूरी हो जाता है। |
डेंगू से बचने या होने पर नीचे दी गयी चीज़ों का सेवन करना चाहिए :–
1. सादा भोजन खायें जिसमें नमक स्वाद से अधिक न हो। मसालेदार चटपटी चीज़ों का सेवन बंद कर दें। |
2. अनार, ज्वार और गेहूँ के घास का रस पियें। |
3. ताज़े मौसमी फलों का सेवन करें। |
4. नारियल पानी और साफ़ पानी का अधिक से अधिक मात्रा में पियें। |
5. विटामिन C युक्त फलों को खाना स्वस्थप्रद रहता है। नींबू, संतरे, मौसम्बी, अंगूर, स्ट्राबरी और जामुन में पर्याप्त मात्रा में वाइटमिन C पाया जाता है। |
6. पपीते के पत्तों का रस बनाकर दिन में दो से तीन बार पिएं, यह माना जाता है कि इससे प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ती है। |
7. पपीते की तरह गिलोय की बेल का सत्व भी शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या नियमित रखने में सहायक होता है। |
विभिन्न औषधियों से चिकित्सा :-
मिल जाता है तो होम्योपैथी की ANBUTA PLUS का उपयोग करें
1. बैप्टीशिया :- इस रोग को ठीक करने के लिए इस औषधि की 3x शक्ति की मात्रा का उपयोग करना चाहिए।
2. जेल्स :- डेंगू ज्वर से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए इस औषधि की θ से 3x शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।
3. युपेट-पर्फ :- डेंगू ज्वर से पीड़ित रोगी की हडि्डयों में दर्द भी हो रहा हो तो उसके इस रोग को ठीक करने के लिए इस औषधि की 1x मात्रा का उपयोग करें।
4. कार्बो-वेज :- डेंगू ज्वर होने के साथ ही शरीर में अधिक सुस्ती महसूस हो रही हो, माथा अधिक गर्म हो लेकिन शरीर ठण्डा पड़ा हो तो रोग को ठीक करने के लिए इस औषधि की 3 शक्ति की मात्रा का उपयोग करना चाहिए।
5. सिमिसिफ्यूगा :- रोगी के हडि्डयों में दर्द होने के साथ ही डेंगू ज्वर हो तो उसके रोग को ठीक करने के लिए इस औषधि की 3x मात्रा का उपयोग करने से रोग ठीक हो जाता है।
6. आर्स :- इस रोग को ठीक करने में सिमिसिफ्यूगा औषधि से लाभ न मिले तो इस औषधि की 3x मात्रा का सेवन करें।
7. एसिड :- फास- डेंगू ज्वर से पीड़ित रोगी में अधिक सुस्ती हो तो उसके रोग का उपचार करने के लिए इस औषधि की 3 शक्ति की मात्रा का उपयोग करना चाहिए।
8. बेलाडोना :- रोगी के शरीर पर लाल रंग की फुंसियां हो या सिर में दर्द हो रहा हो जिसके कारण डेंगू ज्वर पीड़ित रोगी को अधिक परेशानी हो रही हो तो उसके इस रोग का उपचार करने के लिए इस औषधि की 6 शक्ति की मात्रा का उपयोग करना चाहिए।
9. ऐकोनाइट :- डेंगू ज्वर से पीड़ित रोगी में रोग होने के शुरुआती अवस्था में यदि तेज बुखार हो तथा बुखार लगभग 104 से 105 डिग्री के बीच में हो तो इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए इसकी 1x मात्रा का उपयोग करना लाभदायक होता है।
10. ब्रायोनिया :- डेंगू ज्वर होने के साथ ही इस प्रकार के लक्षण हो जैसे- शरीर से पसीना निकलना, सिर में दर्द होना, दर्द का असर अधिकतर माथे के पीछे की ओर होना, कब्ज की समस्या होना तथा पूरे शरीर में दर्द आदि हो तो रोगी के रोग को ठीक करने के लिए इस औषधि की 3 से 6 शक्ति की मात्रा का प्रयोग करने से लाभ मिलता है।
11. लैकेसिस :- डेंगू ज्वर होने के साथ ही श्लेष्मिक-झिल्लियों से खून बहने पर उपचार करने के लिए इस औषधि की 6 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
12. क्रोटेलस :- डेंगू ज्वर से पीड़ित रोगी के श्लैष्मिक झिल्लियों से खून बह रहा हो तो उपचार करने के लिए इस औषधि की 3 शक्ति की मात्रा का प्रयोग करने से लाभ होता है
13. जेलसिमियम :- डेंगू ज्वर होने पर यदि बुखार हल्का हो तो इस रोग को ठीक करने के लिए इस औषधि की 1x मात्रा प्रयोग करना चाहिए।
14. रस-टक्स :- डेंगू ज्वर से पीड़ित रोगी को अधिक सर्दी लगती है तथा फोड़ें फुंसियां होने के साथ ही बुखार हो, हाथ-पैरों में ऐंठन हो रही हो या गठिया हो गया हो तो इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए इस औषधि की 3 शक्ति की मात्रा का प्रयोग करना लाभकारी है।
15. आर्सेनिक :- इस रोग के होने के साथ ही यदि अतिसार हो गया हो तो आर्सेनिक औषधि की 6 शक्ति की मात्रा का उपयोग करने से रोग ठीक हो जाता है।
प्लेटलेट्स की कमी होने का नुकसान आपके शरीर एवं स्वास्थ्य को भुगतना पड़ता है, जानिये इनको कैसे पूरा करे
16. चुकंदर :- चुकंदर का सेवन प्लेटलेट को बढ़ाने वाला एक लोकप्रिय आहार है. प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और हेमोस्टैटिक गुणों से भरपूर होने के कारण, चुकंदर प्लेटलेट काउंट को कुछ ही दिनों बढ़ा देता है. अगर दो से तीन चम्मच चुकंदर के रस को एक गिलास गाजर के रस में मिलाकर पिया जाये तो ब्लड प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ती हैं. और इसमें एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी के कारण यह शरीर की प्रतिरोधी क्षमता भी बढ़ाते हैं.
17. पपीता :- पपीता के फल और पत्तियां दोनों का ही इस्तेमाल कुछ ही दिनों के भीतर कम प्लेटलेट को बढ़ाने में मदद करते हैं. 2009 में, मलेशिया में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के एशियाई संस्थान में शोधकर्ताओं ने पाया कि डेगू बुखार में गिरने वाले प्लेटलेट को पपीता के पत्ते के रस के सेवन से बढ़ाया जा सकता है. आप चाहें तो पपीते की पत्तियों को चाय की तरह भी पानी में उबालकर पी सकते हैं, इसका स्वाद ग्रीन टी की तरह लगेगा.
18. नारियल पानी :- शरीर में ब्लड प्लेटलेट को बढ़ाने में नारियल का पानी भी बहुत मददगार होता है. नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स अच्छी मात्रा में होते हैं. इसके अलावा यह मिनरल का भी अच्छा स्रोत है जो शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं.
19. आंवला :- प्लेटलेट को बढ़ाने के लिए आंवला लोकप्रिय आयुर्वेदिक उपचार है. आंवला में मौजूद भरपूर मात्रा में विटामिन सी प्लेटलेट्स के उत्पादन को बढ़ाने और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करता है. नियमित रूप से सुबह के समय खाली पेट 3-4 आंवला खाये. यह आप दो चम्मच आंवले के जूस में शहद मिलाकर भी ले सकते हैं.
20. कद्दू :- कद्दू कम प्लेटलेट कांउट में सुधार करने वाला एक और उपयोगी आहार है. यह विटामिन ए से समृद्ध होने के कारण प्लेटलेट के उचित विकास का समर्थन करने में मदद करता है. यह कोशिकाओं में उत्पादित प्रोटीन को नियंत्रित करता है, जो प्लेटलेट के स्तर को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होता है. कद्दू के आधे गिलास जूस में एक से दो चम्मच शहद डालकर दिन में दो बार लेने से भी ब्लड में प्लेटलेस्ट की संख्या बढ़ती है.
21. पालक :- पालक विटामिन ‘के’ का एक अच्छा स्रोत है और अक्सर कम प्लेटलेट विकार के इलाज में मदद करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है. विटामिन ‘के’ सही तरीके से होनी वाली ब्लड क्लॉटिंग के लिए आवश्यक है. इस तरह से यह बहुत अधिक ब्लीडिंग के खतरे को कम करता है. दो कप पानी में 4 से 5 ताजा पालक के पत्तों को डालकर कुछ मिनट के लिए उबाल लें. इसे ठंडा होने के लिए रख दें. फिर इसमें आधा गिलास टमाटर मिला दें. इसे मिश्रण को दिन में तीन बार पीयें. इसके अलावा आप पालक का सेवन सूप, सलाद, स्मूदी या सब्जी के रूप में भी कर सकते हैं.
तांबे के सिक्के को एक गिलास पानी मे गर्म कर डुबोये इस प्रकार 11 बार करने के बाद इस जल का सेवन करें वैध आशुतोष राणा जी के अनुभव व ज्ञानानुसार (तांबे के सिक्के को आग पे लाल गर्म करना ह कर पानी मे बुझावा देना ह,11 बार ऐसा कीजिये, फिर उस पानी के तीन हिस्से कर लिजये,एक सवेरे खाली पेट।एक दोपहर ओर एक शाम खाने से 1 घण्टा पहले पिये,पानी की मात्रा 1 गिलास हो तीन दिन ही काफी ह)
गिलोय चूर्ण सौंठ चूर्ण पिपली चूर्ण व तुलसी (श्यामा काली तुलसी हो तो उत्तम) के पत्ते एक एक चम्मच को एक गिलास पानी मे गुड़ या किशमिश या मुन्नका डालकर चौथाई रहने तक उबालकर छानकर पिलायें या इसका पेस्ट बनाकर सेवन करायें
उपलब्धता होने पर कीवी फल व बकरी का दूध सर्वोत्तम है प्लेटलेट्स को बढ़ाने हेतु
तुलसी गिलोय एलोवेरा पपीते के रस को बराबर मिलाये व इसमे शहद मिलाकर थोड़ा थोड़ा पिलाते रहें
होम्योपैथी :-
एमपोटोरियम 30 रस टॉक्स 30 आर्सेनिक 30 जेलशियम 30इनकी 2 2 बून्द एक चम्मच पानी मे हर दो घण्टे पर्सशरीर ठंडा हो तो कार्बोवेज 30 2 बुंद हर 2 घण्टे परमिल जाये तोANBUTA PLUS की 15 बून्द चौथाई कप पानी में दिन में 4 बारनहीं तोOcimum sanctum Q Carica papaya Q Sweritia chirata Q 10 10 बून्द चौथाई कप पानी में दिन में 4 बार |
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