पेट दर्द के देसी घरेलु उपचार || Pet Dard || stomach pain

  पेट दर्द के देसी घरेलु उपचार  

पेट में दर्द का कारण और उपचार

  • उदरशूल अर्थात् पेट में दर्द की विकृति सभी छोटे-बड़ों को, कभी-न-कभी अवश्य पीड़ित करती है।
  • कुछ स्त्री-पुरुष व किशोर तो अपने खाने-पीने की अनुचित आदतों के कारण आए दिन उदरशूल से पीड़ित होते रहते हैं।
  • अनियमित, दूषित, बासी और गरिष्ठ खाद्य पदार्थों के सेवन से अधिकांश स्त्री-पुरुष उदरशूल से पीड़ित रहते हैं।

 

  • घर की अपेक्षा बाजार में उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थ छोले-भठूरे, समोसे, कचौड़ी, आलू की टिक्की आदि खाने वाले उदर शूल से अधिक पीड़त होते हैं।
  • इन खाद्य पदार्थों की पाचन क्रिया सरलता से नहीं होती। दूसरे इन खाद्य पदार्थों से उत्पन्न दूषित वायु (गैस) उदर में आध्मान, कोष्ठबद्धता आदि की उत्पत्ति के साथ उदरशूल की उत्पत्ति करती है।

 

  • पाचन क्रिया की विकृति होने पर उदरशूल की उत्पत्ति होती है। कुछ स्त्री-पुरुष उदरशूल के प्रारंभ में उसकी चिकित्सा पर बिलकुल ध्यान नहीं देते। भोजन में भी शूल उत्पन्न करने वाले खाद्य पदार्थों पर नियंत्रण नहीं रख पाते।
  • ऐसी स्थिति में जब तीव्र रूप से उदरशूल होता है तो चिकित्सक के पास दौड़े जाते हैं।

 

   पेट में दर्द का कारण   

1) उदरशूल की विकृति पाचन क्रिया की विकृति से होती है और पाचन क्रिया हर समय कुछ-न-कुछ खाते रहने, भोजन की पाचन क्रिया संपन्न होने से पहले खाने-पीने से होती है।
2) यदि भोजन में वसायुक्त खाद्य पदार्थों (घी, तेल, मक्खन व दूध से बने) का अधिक अभाव रहे तो उदर में शुष्कता बढ़ती है और पुरीष (मल) अधिक शुष्क और कठोर हो जाता है।जब पुरीष अधिक शुष्क व कठोर होता है तो आंतों से उसका निष्कासन सरलता से नहीं होता। पुरीष आंतों में एकत्र होकर सड़ने लगता है, तब दूषित वायु (गैस), उदर शूल, आध्मान (अफारा) आदि रोगों की उत्पत्ति होती है।
3) कोष्ठबद्धता की विकृति अम्लपित्त, अरुचि, आमाशयिक व्रण, आंत्र शोथ व अर्श रोग को भी जन्म देती है। यकृत और प्लीहा की वृद्धि भी कोष्ठबद्धता के निरंतर बने रहने से होती है।
4) आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार मल-मूत्रादि का वेग रोकने, अधिक मात्रा में भोजन करने, भोजन में गरिष्ठ खाद्य पदार्थों का सेवन करने और अधिक उष्ण मिर्च-मसालों के व्यंजनों का सेवन करने से उदरशूल की उत्पत्ति होती है। अधिक
5) रात्रि तक जागरण करने वाले, शीत ऋतु में दिन में सोने वाले, भोजन करते ही बिस्तर पर सोने वाले और पौष्टिक भोजन करने वाले स्त्री-पुरुष व किशोर जब शारीरिक श्रम नहीं करते हैं तो उदर शूल से पीड़ित होते हैं।
6) कुछ स्त्री-पुरुष कचालू, अरबी, भिण्डी, गोभी, उड़द की दाल के बने व्यंजन अधिक मात्रा में खाते हैं। वात विकार उत्पन्न करने वाले खाद्य पदार्थ, सब्जियां, वायु की उत्पत्ति करके उदरशूल की उत्पत्ति करती हैं।
7) मांस-मछली की तरह इन गरिष्ठ खाद्य पदार्थों की पाचन क्रिया विलंब से होती है और उदरशूल की उत्पत्ति कर देती है। कुछ एलोपैथी औषधियों के साइड इफेक्ट के रूप में भी उदरशूल की उत्पत्ति हो सकती है।
8) आंत्र कृमि (पेट में कीड़े) भी अनेक व्यक्तियों के उदर में शूल की उत्पत्ति करते हैं।

 

   पेट दर्द के घरेलु उपाय   

कालानमक

एक ग्राम कालानमक और 2 ग्राम अजवायन गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है।

 

सौंफ 

सौंफ 3 ग्राम को 50 मिलीलीटर पानी में उबालें और पानी एक चौथाई बच जाए तो छानकर ठंडा करके आधी-आधी चम्मच दिन में 3 बार बच्चे को पिलाएं। इससे बच्चे के पेट का दर्द ठीक होता है

 

नींबू

कच्चे नींबू का छिलका दिन में 2 से 3 बार खाने से पेट में होने वाले बादी का दर्द ठीक होता है।

 

हरड़

6 ग्राम हरड़, बहेड़ा 6 ग्राम और 6 राई को पीसकर पानी के साथ पीने से कब्ज के कारण होने वाले पेट दर्द में आराम मिलता है

 

पोदीना

2 चम्मच सूखे पुदीने को कालानमक के साथ सेवन करने से पेट दर्द में लाभ मिलता है

 

कालीमिर्च

कालीमिर्च, सोंठ और हींग का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिलाकर एक चम्मच की मात्रा गर्म पानी के साथ लेने पेट का दर्द ठीक होता है।

 

सोंठ

सोंठ को पीसकर गुड़ के साथ खाने से भूख के कारण पानी पीने से उत्पन्न पेट दर्द ठीक होता है।

पिसी हुई सोंठ का चूर्ण आधे से एक ग्राम की मात्रा में घी, भुनी हुई हींग व कालानमक के साथ सेवन करने से पेट का पुराने से पुराना दर्द ठीक होता है।

सौंफ को गर्म करके काढ़ा बनाकर या सौंफ का रस निकालकर पीने से पेट का दर्द नष्ट होता है।

3 से 4 बूंद सौंफ के रस को तारपीन के तेल में मिलाकर पेट के ऊपर लगाने से पेट के दर्द में लाभ मिलता है।

 

आंवला

आंवला का रस और विदारीकंद का रस 10-10 ग्राम लेकर शहद के साथ सेवन करने से पेट का दर्द व अन्य रोग ठीक होता है।

 

राई

राई के एक से 2 ग्राम चूर्ण में चीनी मिलाकर आधे कप पानी के साथ पीने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।

 

नारियल

नारियल के पानी में सेंधानमक मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है।

 

खुरासानी अजवायन

खुरासानी अजवायन के 12 ग्राम चूर्ण में आधा ग्राम कालानमक मिलाकर खाने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

 

    कुछ अन्य उपचार    

हींग

हींग का चने की आकार की गोली बनाकर घी के साथ खाने से कब्ज और पेट दर्द नष्ट होता है।

 

फिटकरी

पीसी हुई फिटकरी का चूर्ण खाने के बाद दही पीने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

 

आंवला

आंवला, सनाय, हरड़, बहेड़ा और कालानमक एक साथ मिलाकर बारीक पीस लें और इसमें नींबू का रस मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली खाने से पेट का दर्द ठीक होता है और भूख बढ़ती है।

 

राई

राई को पीसकर पेट पर लेप करने से पेट में होने वाला दर्द और उल्टियां बंद होती है।

 

सोडा

आधा चम्मच खाने का सोडा गर्म पानी में मिलाकर पीने से पेट में गैस बनने से होने वाला दर्द व गैस दूर होता है।

 

सिरका

1 गिलास पानी में थोड़ा-सा सिरका मिलाकर पीने से पेट दर्द ठीक होता है।

 

अमृतधारा

अमृतधारा की 2 से 3 बूंद को बताशे या खांड या पानी के साथ खाने से पेट का दर्द शांत होता है। दस्त, आंव के दस्त, पेट में मरोड़, पेचिश, हैजा, खट्टी डकारें, तेज प्याज, अधिक प्यास, पेट फूलना, पेट का दर्द, भोजन करते समय उल्टी, मंदाग्नि, बादी आदि में आराम मिलता है।

 

नारियल

ताजा नारियल का 10 लीटर पानी निकालकर पकाकर शहद की तरह गाढ़ा बना लें और इसमें जायफल, सोंठ, कालीमिर्च, पीपर और जावित्री का चूर्ण डालकर कांच के बर्तन में भरकर रख लें। यह 10 से 15 ग्राम की मात्रा में 15 दिन तक सेवन करने से अम्लपित्त, पेट का दर्द, लीवर का बढ़ना आदि रोग ठीक होता है।

हरे नारियल का पानी पीने से पेट का दर्द और पेट में पानी भरना ठीक होता है।

 

खुरासानी अजवायन

खुरासानी अजवायन का तेल 2 से 4 बूंद को 1 ग्राम सोंठ के चूर्ण में मिलाकर खाने और ऊपर से गर्म सौंफ का रस 15-20 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से पेट का दर्द शांत होता है।

खुरासानी अजवायन और गुड़ मिलाकर खाने से वायु के कारण होने वाली पेट की पीड़ा समाप्त होती है।

 

त्रिफला

त्रिफला का चूर्ण 3 ग्राम और मिश्री 3 ग्राम को मिलाकर गर्म पानी के साथ पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।

त्रिफला (हर्र, बहेड़ा और आंवला) को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करें। इससे पेट का दर्द ठीक होता है।

 

हरड़

हरड़ का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ पीने से कब्ज के कारण होने वाला दर्द ठीक होता है।

3 ग्राम हरण का चूर्ण गुड़ के साथ खाने से पेट में गैस बनने के कारण उत्पन्न दर्द ठीक होता है।

पिसी हुई हरड़ का चूर्ण एक चुटकी और आधा चुटकी पीपल का चूर्ण लेकर सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से पेट दर्द में लाभ मिलता है।

हरड़ को बारीक पीसकर इसके चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर खाने से पेट का दर्द ठीक होता है।

 

पानी

गर्म पानी को बोतल में भरकर पेट की सिंकाई करने से सभी प्रकार के पेट दर्द में लाभ मिलता है।

पानी गर्म करके फिर उस पानी को ठंडा करके 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से पेट की बीमारी में आराम मिलता है।

1 गिलास गर्म पानी में नींबू का रस निचोड़कर सेवन करने से पेट की कब्ज, बदहजमी, बदबूदार गैस और पेट दर्द ठीक होता है।

 

सेंधानमक

सेंधानमक, कालानमक, नौसादर, चव्य, चित्रक, शुंठी, पिप्पली की जड़ और हींग बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ सेवन करें। इससे कफ के कारण उत्पन्न पेट का दर्द समाप्त होता है।

आधे चम्मच सेंधानमक को 1 गिलास पानी में मिलाकर गर्म पानी में मिलाकर पीने से शरीर में मौजूद विजातीय तत्व बाहर निकल आते हैं और पेट दर्द में आराम मिलता है।

सेंधानमक 5 ग्राम, छोटी इलायची का दाना 5 ग्राम, भुनी हींग 5 ग्राम और भारंगी 5 ग्राम को अच्छी तरह पीसकर छान लें। यह चूर्ण एक चौथई ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है।

 

कालीमिर्च

2 कालीमिर्च के दाने और 4 चम्मच अनार के दाने को पीसकर चटनी बनाकर सुबह-शाम चाटने से पेट दर्द में लाभ मिलता है।

2 ग्राम कालीमिर्च, 2 ग्राम हींग और सोंठ 2 ग्राम को पीसकर सुबह-शाम सेवन करने से पेट की पीड़ा में आराम मिलता है।

1 ग्राम कालीमिर्च के चूर्ण में अदरक व नीबू का रस मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है।

कालीमिर्च, सोंठ, पीपल, पांचों नमक, सज्जी और थोड़ी-सी मात्रा में जमालगोटा मिलाकर चूर्ण बनाकर छाया में सुखा लें। यह आधा चम्मच चूर्ण प्रतिदिन सेवन करने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

 

हींग

शुद्ध हींग को देशी घी में पीसकर चाटने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

हींग को गर्म पानी में पीसकर नाभि के आस-पास गाढ़ा लेप लगाने से पेट का दर्द शांत होता है।

सेंकी हुई हींग और जीरा, सोंठ व सेंधानमक पीसकर चौथाई चम्मच गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द में लाभ मिलता है।

हींग को पानी के साथ गर्म करके पीने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

हींग, अजवायन और काला नमक को पीसकर चूर्ण बनाकर गर्म पानी के साथ रोगी को देने से पेट दर्द में लाभ होता है।

एक चौथाई ग्राम भुनी हुई हींग को गर्म पानी के साथ दिन में तीन बार पीने से पेट दर्द में लाभ मिलता है।

हींग 2 से 3 ग्राम की मात्रा में घोलकर बस्ति पर लगाने से अफारा (गैस) के कारण उत्पन्न पेट का दर्द समाप्त होता है।

भुनी हुई हींग थोड़ी मात्रा में खाने से पेट के दर्द में आराम मिलता है। ( और पढ़ें – हींग खाने के 73 सेहतमंद फायदे )

2 ग्राम हींग को 500 मिलीलीटर पानी में उबालें और जब पानी एक चौथाई रह जाए तो गर्म-गर्म सेवन करने से सभी प्रकार का पेट दर्द ठीक होता है।

 

नींबू

कागजी नींबू के एक छोटे चम्मच रस में पिसा हुआ कालानमक एक चुटकी डालकर एक कप गुनगुने पानी में अच्छी तरह मिलाकर रोगी को देने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

नींबू को काटकर इसमें कालानमक, कालीमिर्च और जीरा भरकर गर्म करके चूसने से पेट का दर्द ठीक होता है और पेट के कीड़े खत्म होते हैं।

नींबू का 12 मिलीलीटर रस, अदरक का रस 6 मिलीलीटर और शहद 6 ग्राम को मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है।

नींबू के 5 मिलीलीटर रस में अदरक का रस मिलाकर पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।

आधे नींबू के रस में थोड़ा सा सेंधानमक मिलाकर 100 मिलीलीटर पानी में डालकर पीने से पेट का दर्द नष्ट होता है।

नींबू के रस में शहद व जवाखार मिलाकर चाटने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

 

सौंफ

सौंफ, जीरा और सेंधानमक बारीक पीसकर गर्म पानी के साथ पीने से पेट दर्द में लाभ मिलता है।

3 ग्राम सौंफ में चुटकी भर सेंधानमक मिलाकर खाने से पेट की पीड़ा समाप्त होती है।

भुनी हुई सौंफ खाने से पेट की बीमारी समाप्त होती है और पाचन क्रिया तेज होता है।

सौंफ और सेंधानमक पीसकर 2 चम्मच की मात्रा में गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द ठीक होता है।

सौंफ, जीरा और सेंधानमक बारीक पीसकर गर्म पानी के साथ पीने से पेट दर्द में लाभ मिलता है।

सौंफ 10 ग्राम, अजवायन 10 ग्राम और कालानमक 10 ग्राम को पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 1-1 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ खाना खाने के बाद सेवन करें। इससे पेट दर्द में आराम मिलता है।

 

कालानमक

कालानमक, सोंठ और भुनी हुई हींग को पीसकर बने चूर्ण को गर्म पानी के साथ प्रयोग करने से पेट में बनी गैस के कारण होने वाला दर्द ठीक होता है।

कालीनमक, कालीमिर्च और पीपल 20-20 ग्राम को 10 ग्राम भुना हुआ सुहागा के साथ पीसकर नींबू का रस मिलाकर 1-1 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे भूख न लगने के कारण उत्पन्न पेट दर्द ठीक होता है और भूख बढ़ती है।

कालानमक, सेंधानमक, सादा नमक, खुरासानी, बच, जवाखार, दंती, कूट और सोंठ को अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें। यह चूर्ण आधी चम्मच की मात्रा में गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द नष्ट होता है।

कालानमक, हींग और पुदीना पीसकर थोड़ी से पानी में पकाकर बच्चे को दो चम्मच की मात्रा में पिलाने से उसका पेट दर्द ठीक होता है।

1 ग्राम कालानमक के साथ 3 ग्राम अजमोद मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द दूर होता है।

 

सोंठ

3 ग्राम सोंठ के चूर्ण में सेंधानमक मिलाकर गर्म पानी के साथ पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।

सोंठ 10 ग्राम, 50 ग्राम सौंफ व 30 ग्राम मस्तंगी को पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में खाने से पेट दर्द से आराम मिलता है।

सोंठ का चूर्ण, जीरे का चूर्ण, हींग एक-एक चौथाई ग्राम, 2 चुटकी काला व सेंधानमक मिलाकर गर्म पानी के साथ लेने से पेट का दर्द ठीक होता है

सोंठ, कालीमिर्च, जवाखार और सेंधानमक पीसकर चूर्ण बनाकर छाछ के साथ पीएं। यह सन्निपात के कारण होने वाले पेट दर्द को समाप्त करता है।

सोंठ को पीसकर मदार के दूध में अच्छी तरह मिलाकर छोटी-छोटी गोली बनाकर छाया में सुखा लें और यह 1-1 गोली 1-1 घंटे पर सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है।

सोंठ, हींग, वच, जीरा और कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर 3 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से पेट का दर्द समाप्त होता है।

सोंठ, चौकिया सुहागा, सेंधानमक, हींग व नौसादर बराबर मात्रा में लेकर पीसकर सहजने के रस में अच्छी तरह मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली आधे-आधे घंटे के अंतर गुनगुने पानी के साथ रोगी को देने से पेट की बीमारी ठीक होती है।

सोंठ 10 ग्राम, काला नमक 10 ग्राम, अनारदाना 10 ग्राम व भुनी हींग 10 ग्राम को मिलाकर चूर्ण बनाकर 4 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

बारीक पीसी हुई सोंठ में एक चौथाई ग्राम हींग को मिलाकर गुनगुने पानी के साथ पीने से किसी भी कारण से पेट में होने वाला दर्द ठीक होता है।

 

पोदीना

3 ग्राम पोदीना, जीरा, हींग, कालीमिर्च और नमक आदि को पीसकर पानी में मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है।

पोदीना, सौंफ, सोंठ और गुलकंद को पीसकर पानी में उबालकर दिन में 3 बार सेवन करने से पेट का दर्द और कब्ज की शिकायत दूर होती हैं।

सूखा पोदीना और चीनी को बराबर मात्रा में पीसकर 2 चम्मच की मात्रा में गर्म पानी के साथ पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।

पोदीना के पत्तों का शर्बत बनाकर पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।

5 मिलीलीटर पोदीने का रस और 5 मिलीलीटर अदरक का रस मिलाकर इसमें थोड़ा सा सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है।

पुदीना नियमित रूप से खाने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

4 ग्राम पोदीने में आधा चम्मच सौंफ, आधा चम्मच अजवायन, थोड़ा सा कालानमक और एक चौथाई ग्राम हींग मिलाकर बारीक पीसकर गर्म पानी के साथ सेवन करें। इससे पेट में होने वाला दर्द ठीक होता है।

 

एरण्ड

10 मिलीलीटर एरण्ड के तेल को दूध में मिलाकर पीने से कब्ज के कारण होने वाले पेट दर्द में आराम मिलता है।

एरण्ड के तेल में हींग को बारीक पीसकर मिलाकर पेट के ऊपर लेप करने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

एरण्ड का तेल सेवन करने से पेट में दर्द नहीं होता और रुका हुआ मल आसानी से निकल आता है। छोटे बच्चे से लेकर बूढ़ों तक के लिए यह औषधि उपयोगी है।

एरण्ड के बीजों की मींगी पीसकर गाय के 4 गुना दूध में पकाएं और जब यह खोया की तरह हो जाए तो इसमें 20 ग्राम खांड या चीनी मिलाकर चाशनी बना लें। यह प्रतिदिन 15 ग्राम की मात्रा में खाने से पेट की गैस मिटती है और दर्द दूर होता है।

पुराने पेट के दर्द में प्रतिदिन रात को सोते समय 125 मिलीलीटर गर्म पानी में एक नीबू का रस मिलाकर एरण्ड के तेल में मिलाकर पीने से कुछ समय में दर्द दूर हो जाता है।

एरण्ड के तेल में जवाखार मिलाकर सेवन करने से कफ के कारण उत्पन्न पेट दर्द में आराम मिलता है।

एरण्ड के पत्तों के रस में सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है।

 

अजवायन

अजवायन का चूर्ण 60 ग्राम और कालानमक 10 ग्राम को गर्म पानी के साथ पीने से पेट का दर्द, पेट की गैस, वायु गोला बनना ठीक होता है।

अजवायन का रस 2-2 बूंद पान के साथ सेवन करने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

बड़ी अजवायन के बारीक चूर्ण नमक में मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है।

अजवायन, सेंधानमक, हरड़ और सोंठ बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 1 से 2 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट का दर्द नष्ट होता है।

गर्भवती स्त्री को अजवायन के लड्डू और भोजन के बाद अजवायन का 2 ग्राम चूर्ण देने से आंतों के कीड़े मर जाते हैं। इससे भोजन ठीक से पचता है और भूख अच्छी लगती है

अजवायन, सेंधानमक, जीरा, चीता को अच्छी तरह पीसकर छाछ के साथ पीने से बादी के कारण होने वाला दर्द मिटता है।

अजवायन के चूर्ण को पोटली में बांधकर पेट पर सिंकाई करने से पेट की पीड़ा शांत होती है।

2 चम्मच अजवायन, 8 चम्मच जीरा और 2 चम्मच कालानमक को पीसकर शीशी में भरकर रख लें। यह चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में 1 गिलास पानी मिलाकर नींबू निचोड़कर पीने से पेट का दर्द, अपच में लाभ मिलता है।

अजवायन 3 ग्राम को लाहौरी नमक 1 ग्राम को पीसकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

अजवायन के रस को पानी में मिलाकर पानी के साथ मिलाकर पीने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

अजवायन 10 ग्राम, कालीमिर्च 5 ग्राम और सेंधानमक 5 ग्राम को पीसकर गर्म पानी के साथ 3-4 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है।

अजवायन 20 ग्राम और नौसादर 10 ग्राम को पीसकर यह चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ पीने से पेट दर्द में लाभ मिलता है।

बच्चे के पेट में दर्द होने पर बारीक स्वच्छ कपड़े के अंदर अजवायन को रखकर बच्चे को चटाने से पेट का दर्द तुरंत मिट जाता है।

3 ग्राम अजवायन में आधा ग्राम कालानमक मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट की गैस, पेट का दर्द, मंदाग्नि और अम्लपित्त ठीक होता है।

 

 

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