संभोग करने की तैयारी
संभोग करने से पहले किन-किन बातो का ध्यान रखे
पति और पत्नी को जिस दिन संभोग करना हो तो उस दिन उन्हें रात का भोजन जल्दी ही कर लेना चाहिए। इससे संभोग क्रिया के समय पेट भारी-भारी सा नहीं लगेगा। |
रात के समय भोजन में अचार, खट्टे पदार्थ, भारी भोजन आदि नहीं करने चाहिए क्योंकि यह पदार्थ वीर्य को दूषित और पतला कर देते हैं जिससे वीर्य जल्दी ही निकल जाता है और व्यक्ति को शीघ्रपतन का रोग लग जाता है। |
जब स्त्री का मासिक धर्म आए तो इस दौरान उसके पास नहीं जाना चाहिए क्योंकि इससे किसी तरह का रोग लग जाने का डर रहता है। |
संभोग क्रिया करने के लगभग आधे घंटे के बाद नहाना स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अच्छा रहता है। |
संभोग करने के बाद दूध, जलेबी, खजूर या कुछ मीठे पदार्थ खाने से शरीर में शक्ति पैदा होती है। |
<———- सावधानी ———->
संभोग करने से पहले स्त्री और पुरुष दोनों को मूत्र त्याग करके आना चाहिए। ऐसा करने से जननेन्द्रियां पूरी तरह प्राकृतिक रूप से काम करती हैं। |
संभोग करने से पहले पानी नहीं पीना चाहिए या प्यास लगने की अवस्था में संभोग नहीं करना चाहिए। संभोग करने के बाद लगभग 15 मिनट तक पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे जुकाम हो सकता है और संभोग शक्ति कम हो सकती है। |
संभोग करने से पहले अफीम, शराब, चरस, कोकीन आदि नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। यह पदार्थ रक्त में उत्तेजना पैदा करके शुरुआत में तो पुरुष की काम-उत्तेजना को तेज करते हैं और स्तंभन शक्ति बढ़ाते हैं लेकिन कुछ समय के बाद दिमाग को इतना कमजोर कर देते हैं कि फिर संभोग क्रिया कर ही नहीं पाता। |
जिस समय संभोग करना हो उस समय मन में किसी तरह की परेशानी या तनाव आदि नहीं रखना चाहिए। |
संभोग के लिए सही और गलत अवस्था
दिन में संभोग करना किसी भी नजरिये से उचित नहीं रहता है क्योंकि दिन गर्म होता है और आपस में संभोग करने से भी गर्मी पैदा होती है। इसका नतीजा यह होता है कि शरीर में गर्मी पैदा होने का डर रहता है। दिन में संभोग करने से जो संतान पैदा होती है वह पित्त-प्रकृति वाली, गुस्सैल, कठोर स्वभाव की, बेशर्म और कामुक स्वभाव की होती है। |
मासिकधर्म के दिनों में स्त्री के साथ संभोग करने से दूर रहना चाहिए। नई-नवेली दुल्हन शर्म आदि के कारण पति को मासिकधर्म के बारे में नहीं बता पाती है।इसलिए पति के लिए यह जरूरी है कि इस बात का पूरी तरह निश्चय हो जाने के बाद ही संभोग करे जब लगे कि स्त्री का मासिकधर्म बंद हो चुका है। |
जहां तक हो सके एक रात में एक ही बार संभोग करना चाहिए और दूसरी बार संभोग करने के बीच में कम से कम 4-5 दिन का अंतर रखना चाहिए। |
जब यह बात पक्के तौर पर मालूम हो जाए कि स्त्री को गर्भ ठहर गया है तो शुरुआती 3 महीनों तक उसके साथ संभोग नहीं करना चाहिए। इसके बाद चौथे, पांचवे और छठे महीनें में दोनों की इच्छा से और सावधानी से संभोग क्रिया की जा सकती है। |
थकान होने पर, सिर में दर्द होने पर, वीर्य रोग में, जिगर, मूत्राशय, फेफड़े, आंख, मेदा, हृदय और मस्तिष्क में किसी रोग के हो जाने पर संभोग नहीं करना चाहिए। |
बच्चे के जन्म लेने के कम से कम 1.5 महीने तक स्त्री के साथ संभोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इतने समय से पहले स्त्री की बच्चेदानी अपने स्वाभाविक रूप में नहीं आ पाती है। |
अगर स्त्री का मासिकधर्म अनियमित हो, उसे श्वेतप्रदर आने का रोग हो, गर्भाशय टेढ़ा हो या उसे खुजली आदि हो तो उसके ठीक होने तक उसके साथ संभोग नहीं करना चाहिए। |
बच्चे को दूध पिलाने वाली स्त्री के साथ संभोग नहीं करना चाहिए क्योंकि अगर उसे गर्भ ठहर जाता है तो उसका दूध दूषित हो जाता है और जिसको पीने से बच्चे का स्वास्थ्य खराब हो सकता है। |
अगर पुरुष को स्वप्नदोष, प्रमेह या शीघ्रपतन आदि का रोग हो तो उसके साथ स्त्री को संभोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे उसका रोग बढ़ सकता है और स्त्री भी रोगी हो सकती है। |
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