शीघ्रपतन की समस्या || Ejaculation || viryapat

सभी साथियों को वन्देमातरम आज हम इस लेख मैं शीघ्रपतन या वीर्यपात के कारण और समाधान जानेंगे आज कल का खान-पान ऐसा चल रहा हैं जिससे कुछ ना कुछ हम्हारे शरीर मैं समस्या होती ही रहती हैं ऐसे ही शीघ्रपतन या वीर्यपात जिस के बारे मैं ज्यादातर लोग बता नहीं पाते हैं | और आगे उनको और भी परेशानी उठानी पड़ती हैं मगर इस लेख को पड़ने के बाद आप इस परेशानी से हमेशा के लिए पा सकते हैं  छुटकारा !  आईये जानते हैं  शीघ्रपतन से जुडी कुछ मुख्य बातें | 

शीघ्रपतन या वीर्यपात के कारण और समाधान

इसके अंदर शीघ्रपतन का होना एक प्रमुख यौन परेशानी है, क्योंकि यह परेशानी शीघ्रपतन तथा विलंबिल स्खलन से जुड़ी होती है। कई पुरुष इस अवस्था में होते हैं कि उनका लिंग योनि में जाते ही वीर्यपात हो जाता है तथा कई पुरुषों का वीर्य योनि में प्रवेश करने से पहले ही निकल जाता है और कुछ पुरुषों का वीर्य योनि के अंदर जाने के कुछ ही समय के अंदर निकल जाता है। यदि इस तरह से देखा जाए तो शीघ्रपतन का मतलब होता है कि पुरुष का समय से पहले ही वीर्यपात का हो जाना। शीघ्रपतन होने की वजह निम्नलिखित क्रिया की वजह से होती है।

 

किसी वजह से परेशानी होने से आपसी रिश्तों में दिक्कतें आ जाती हैं।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

 

सेक्स क्रिया करते समय उसके बारे में ज्ञान न होना क्योंकि काफी समय तक सेक्स से दूरी बनाए रखना

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

 

वीर्यपात को निकलने को रोकने के लिए सफल न होना तथा अपने आप को शीघ्रपतन का मरीज समझना।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

 

विलंबित वीर्यपात

यह समस्या वीर्यपात के बिल्कुल विपरीप है। विश्वभर में 10 में से 5 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो संभोग क्रिया करते समय आगे-पीछे झटके लगाने की बजाय अगल-बगल में झटके लगाते हैं और कई लोग एक-दो बार ही आगे-पीछे झटके मार कर आराम करना पसंद करते हैं।

इसलिए कहने का तात्पर्य यह है कि अगर आज के माहौल को देखते हुए यदि नवयुवकों को सेक्स के बारे में सही तरीके से जानकारी दे दी जाए तो इस प्रकार से सेक्स के प्रति होने वाले रोगों की समस्या भी कम हो जाएगी।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

 

वीर्यपात

पेशाबमार्ग की नली से होते हुए जोर के झटके के साथ फुहारे के रूप में जो वीर्य निकलता है वह वीर्यपात कहलाता है। अगर पुरुष वीर्यपात को पूर्ण रूप से रोकना चाहता है तो उसे अपना अधिकतर समय चरम सीमा पर लगाना चाहिए। इस तरह से करने से सेक्स करने की उत्तेजना आ जाती है जिसकी वजह से पुरुष उस अवस्था में जा पहुंचता है कि वह वीर्यपात करने के लिए मजबूर होने लगता है।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

इस तरह से करने के बाद पुरुष किसी भी तरह अपनी सारी उत्तेजना को रोक दें परन्तु कूल्हें की पेंशियां कुछ देर के लिए तो सिकुड़ जाती हैं लेकिन वीर्य पिचकारी की तरह निकलता है। कई पुरुष ऐसे होते हैं जो वीर्यपात को रोकने के लिए नए-नए तरीके अपनाते हैं। वे वीर्यपात को रोकने के लिए क्रीम या मलहम का इस्तेमाल करते हैं तथा कई पुरुष तो शराब तक का सहारा ले लेते हैं।

 

वीर्यपात को कंट्रोल में करने का सबसे सरल उपाय यह है कि हस्तमैथुन करने के लिए कुछ देर के लिए रुक जाएं और इसके बाद फिर हस्तमैथुन शुरू कर दें या फिर हस्तमैथुन करते समय अपने लिंग को हाथों से दबाने की कोशिश करें, क्योंकि सेक्स क्रिया का सुख पाने के लिए लिंग को दबाने का तरीका भी एक सरल उपाय है। इस तरह से करने को लिंग का व्यायाम भी कहा जा सकता है।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

 

व्यायाम करने की पहली विधि

पहली विधि

हस्तमैथुन करने के लिए हाथ को आगे तथा पीछे करते रहें, जब आपको यह महसूस हो कि वीर्य निकलने वाला है तो उसी समय तुरंत ही रुक जाना चाहिए। उसके बाद कुछ समय रुककर इस कार्य को दुबारा से शुरू कर देना चाहिए। इस क्रिया को करते समय कम से कम पंद्रह मिनट का समय लगाना चाहिए तथा इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जब रुके और जब शुरू करें तो इन दोनों के बीच इतना अंतर होना चाहिए कि पुनः हस्तमैथुन करते समय वीर्यपात करना जरुरी न हो जाए।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

इस व्यायाम को करने का यह मतलब होता है कि पुरुष वीर्यपात के निकलने से पहले के कारण को जान लें और वीर्य के निकलने से पहले ही अपनी उत्तेजना को रोकने के बारे में प्रैक्टिस करना सीख लें।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

 

दूसरी विधि

इस व्यायाम को करने के लिए अपने लिंग को इस प्रकार से पकड़े कि आपके हाथ का ज्यादा से ज्यादा स्पर्श आपके लिंग के साथ हो, यानि की लिंग योनि के अंदर जाने की जगह बना लें। लिंग के ऊपर अगर जरा सी कोई क्रीम या कोई चिकना तरल पदार्थ लगा लिया जाए तो उत्तेजना बनी रहेगी। चिकनाई लगाने से पुरुष को यह महसूस होता है कि वह योनि के अंदर लिंग से कार्य कर रहा है। इस प्रकार इस क्रिया को करने से वीर्य काफी समय बाद बाहर निकलता है।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

 

अपने साथी की सहायता से वीर्यपात पर काबू करने की प्रैक्टिस

पहली विधि

इस विधि को करने के लिए सबसे पहले पति पीठ के बल चित लेट जाए। इसके पश्चात पत्नी पति की टांगों के बीच में इस प्रकार से बैठे कि पत्नी की टांगें पुरुष की टांगों के ठीक नीचे हो। इसके बाद पत्नी अपने पति के लिंग को अपने हाथों से हस्तमैथुन करें। जब पति को यह लगने लगे कि उसका वीर्य बाहर निकलने वाला है तो पति को शीघ्र ही अपनी पत्नी को रुकने के लिए कह दे तो उसी समय पत्नी उसके लिंग पर से अपना हाथ हटा ले।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

सके कुछ समय के बाद आराम करने पर पुरुष दूबारा से अपनी स्त्री को इस कार्य को करने के लिए कहे तथा इसके बाद पुनः आराम करें। इस कार्य को करने के लिए पंद्रह मिनट से ज्यादा का समय नहीं लगना चाहिए। इस क्रिया को करते समय पुरुष को केवल अपनी कार्य पर ही ध्यान रखना चाहिए। सेक्स करते समय पुरुष को स्त्री के अंगों या सेक्स का बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए। इस व्यायाम को करने रहने के बाद पुरुष 10 या 15 मिनट के बाद ही वीर्यपात करता है।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

 

दूसरी विधि

दूसरी विधि को करने के लिए स्त्री को वीर्यपात तक पहुंचने की बजाय पुरुष के लिंग के अंदर तनाव आने तक उसको उत्तेजित करें, इस तरह से करने के बाद स्त्री को पुरुष के ऊपर आ जाना चाहिए। इसके पश्चात स्त्री धीरे-धीरे पुरुष के लिंग को अपने हाथों से पकड़कर योनि के अंदर डाल दें।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

इसके बाद जब लिंग योनि के अंदर चला जाए तो स्त्री को चाहिए कि वह इस तरह बिना किसी चिंता के बिल्कुल चुप होकर लेटी रहें कि पुरुष को लगे कि उसका लिंग स्त्री की योनि के अंदर ही है। ऐसा करने के बाद जब पुरुष को यह महसूस हो कि उसका वीर्य निकलने वाला है तो उसे स्त्री को अपने ऊपर से हटा देना चाहिए। पुरुष का तनाव समाप्त हो जाने पर इस प्रकार का कार्य 15 मिनट तक करना चाहिए।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

 

तीसरी विधि

यह विधि दूसरी विधि की ही तरह होती है। इस विधि में स्त्री पुरुष के ऊपर होती है तथा इस विधि में स्त्री की भूमिका बहुत ही जरुरी होती है। इस विधि में पुरुष स्त्री के कूल्हों को पकड़कर आगे-पीछे करता है। जब पुरुष यह महसूस करने लगे कि उसका वीर्य बाहर निकलने ही वाला है तो उसे स्त्री को इस क्रिया को करने के लिए रोक देना चाहिए।

वीर्यपात || Ejaculation || arogyajagat

कुछ समय आराम करने के बाद दुबारा से इस क्रिया को शुरू कर देना चाहिए। लेकिन इसके साथ ही इस बात को भी जरुर ध्यान रखें कि पुरुष के अंदर तनाव शीघ्रता से न आए। लिंग के अंदर तनाव धीरे-धीरे से ही आना चाहिए। पुरुष को इस क्रिया को तब तक करना चाहिए जब तक वे दोनों इस कार्य से संतुष्ट नहीं हो जाते हैं। इन तीनों विधियों को सीखने के बाद पुरुष किसी भी व्यायाम के द्वारा से संभोग क्रिया कर सकता है।

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